कभी-कभी मेरे शब्द स्तब्ध हो जाते हैं – Poem by Anjali Srinivas

✍️ अंजलि श्रीनिवास खटवटे
हुबली

कभी-कभी मेरे शब्द स्तब्ध हो जाते हैं,
कभी-कभी मेरे शब्द स्तब्ध हो जाते हैं,
ना कोई बात, ना सोच खुद से,
दूर होकर खुद से लगाव।

कभी-कभी लंबी खामोशी,
कभी-कभी खुद से नाराजगी,
ना कोई कलम से कशिश,
ना कोई कदम से साजिश।

समुंदर के किनारे बैठे हुए महसूस करते हैं मौन की धारा,
जैसे नीले गगन को ताकते हुए टिमटिमाता तारा,
अपने श्वासों की धीमी लय देखकर,
कुछ ना सोचना, बस मौन उत्तर हर प्रश्न का।

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